आकाश को जमीन पर उतारने के बाद मायावती ने कह दी बड़ी बात कहा रिश्ते नातों से बड़ी है पार्टी –
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने साफ कर दिया है कि पार्टी के मामलों में परिवार या रिश्तेदारों का कोई दखल नहीं होगा। उनके इस बयान को भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने के फैसले से जोड़कर देखा जा रहा है। साथ ही, उन्होंने विपक्षी दलों पर बसपा को कमजोर करने की साजिश रचने का आरोप लगाया और कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील की।
‘रिश्तेदार सिर्फ बहुजन समाज का हिस्सा, बसपा में कोई विशेष दर्जा नहीं’
मायावती ने जोर देकर कहा कि बसपा में किसी भी नेता को सिर्फ रिश्तेदारी के आधार पर पद नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा, “मेरे भाई–बहन और अन्य रिश्तेदार सिर्फ बहुजन समाज का हिस्सा हैं, पार्टी में उनका कोई विशेष दर्जा नहीं है।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब बसपा में अंदरूनी कलह और परिवारवाद को लेकर सवाल उठ रहे थे। मायावती ने यह स्पष्ट कर दिया कि बसपा की प्राथमिकता संगठन और मूवमेंट रहेगा, न कि रिश्तेदारों को आगे बढ़ाना।
‘बसपा को कमजोर करने की साजिश नाकाम होगी’
मायावती ने विपक्षी दलों पर हमला करते हुए कहा कि जातिवादी और सांप्रदायिक पार्टियां बसपा को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा, “2007 में बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद से ये ताकतें हमें खत्म करने की साजिश कर रही हैं, लेकिन बाबा साहेब और कांशीराम के मिशन को हम किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देंगे।”
‘छोटे दलों के नाम पर बहुजन समाज को तोड़ने की कोशिश’
बसपा प्रमुख ने बिना किसी का नाम लिए आरोप लगाया कि कुछ स्वार्थी लोग छोटे–छोटे संगठन और पार्टियां बनाकर बहुजन समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। माना जा रहा है कि उनका इशारा आजाद समाज पार्टी और चंद्रशेखर आजाद की ओर था।
उन्होंने कार्यकर्ताओं को आगाह करते हुए कहा, “बसपा का आधार कमजोर करने के लिए ऐसी चालें चली जा रही हैं, लेकिन हमें सतर्क रहना होगा और संगठन को और मजबूत बनाना होगा।”
‘वक्फ बिल पर राजनीति चिंता की बात’
वक्फ संशोधन बिल को लेकर चल रही बहस पर भी मायावती ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि सत्ता और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वक्फ बिल पर आम सहमति बनाकर इसका समाधान निकाला जाए ताकि इसे लेकर राजनीतिक माहौल और अधिक न बिगड़े।